हे भगवान,

हे भगवान,
इस अनंत अपार असीम आकाश में......!
मुझे मार्गदर्शन दो...
यह जानने का कि, कब थामे रहूँ......?
और कब छोड़ दूँ...,?
और मुझे सही निर्णय लेने की बुद्धि दो,
गरिमा के साथ ।"

आपके पठन-पाठन,परिचर्चा एवं प्रतिक्रिया हेतु मेरी डायरी के कुछ पन्ने

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गुरुवार, 7 अक्तूबर 2010

प्रिय राहुल और माननीय गृह मंत्री जी, मैंने भगवा ओढ़ लिया है...

जहाँ माननीय गृह मंत्री भगवा आतंकवाद का सिद्धांत प्रतिपादित कर रहे है, वहीँ कांग्रेस के युवराज संघ और सिमी को एक ही तराजू में तौल रहें है, मुझे दोनों की क्षमता और नीयति पर कोई शक नहीं है मगर ऐसा भी नहीं है कि वो अनजाने में नादानी नहीं कर सकते है ! 
आखिर भारत वर्ष की शान और रणचंडी सी महान नेता श्रीमती इंदिरा गाँधी ने भी कई नादानियाँ की और पूर्वोत्तर और पंजाब में मात्र राजनैतिक बढ़त हासिल करने के चक्कर में अनजाने में आतंकवाद को एक नया चेहरा प्रदान कर दिया था । और कुछ इसी तरह आज कश्मीर के हुक्मरान भी वहां कर रहें है ........
इसी तरह अगर राहुल गाँधी और चिदम्बरम साहेब के बोलने और सोंचने का अंदाज ना बदला तो कहीं ऐसा ना हो जाय कि सामान्य जनमानस भी वही कहने लगे जो.... डॉ. जय प्रकाश गुप्त ने  http://bhadas.blogspot.com/2010/09/blog-post_1394.com पर कहा है , और वो मेरे जेहन और जबान पर ना चाहते हुए भी चढ़ा रह रहा है
जरा देखें....

शीश शिखा होने से पक्का हिन्दु था ही,
मैंने भगवा ओढ़ लिया, मैं आतंकी हूँ।
आतंकी है भोर, है गोधूलि आतंकी ,
वह्नि की ज्वाला है दीपशिखा आतंकी ।
आतंकी है यज्ञ वेदमन्त्र आतंकी,
आतंकी यजमान पुरोहित भी आतंकी।
मैं इन सब का आदर करता पूज्य मानता इन्हें,
अत: मैं मान रहा मैं आतंकी हूँ।
मैंने भगवा ओढ़ लिया, मैं आतंकी हूँ।
आतंकी है राम और कृष्ण आतंकी ,
विश्वामित्र वसिष्ठ द्रोण कृप हैं ।
आतंकी बृहस्पति भृगु देवर्षि नारद आतंकी,
व्यास पराशर कुशिक भरद्वाज आतंकी ।
मेरे ये इतिहास पुरुष पितृ ये मेरे ,
वंशज इनका होने से मैं आतंकी हूँ।
मैंने भगवा ओढ़ लिया, मैं आतंकी हूँ।
नामदेव नानक और दयानन्द आतंकी ,
रामदास (समर्थ) विवेकानन्द आतंकी ।
आदिशंकराचार्य रामकृष्ण आतंकी ,
गौतम कपिल कणाद याज्ञवल्क्य आतंकी ।
ये मेरे आदर्श सदा सर्वदा रहे हैं,
इसीलिए मैं कहता हूँ मैं आतंकी हूँ।
मैंने भगवा ओढ़ लिया, मैं आतंकी हूँ।
भगवा तो भारत की है पहचान कहाता ,
प्रिय तिरंगा भी भगवा से शोभा पाता ।
भारतमाता के कर में भगवा फहराता ,
भारत की अस्मिता से है भगवा का नाता ।
बोध यदि भगवा का उग्रवाद से हो तो,
 अच्छा यही कि सब बोलें मैं आतंकी हूँ।
मैंने भगवा ओढ़ लिया, मैं आतंकी हूँ।
मैंने भगवा ओढ़ लिया, मैं आतंकी हूँ। 

तो
हे माननीय शासक गण
आपसे अनुरोध है की कृपया ये स्थिति ना आने दे ,
शब्दों का सूक्षमता और संजीदगी से चयन और प्रयोग करें  
और कुछ गिने चुने मूर्खों के कारण समस्त हिन्दू जनमानस की भावनावों को
नाहक विभन्न तरीकों से आहत कर किसी नये आतंकवाद को जबरदस्ती ना खड़ा करें ।
हिन्दुवों के लिए यह धरती उनकी माँ के समान है, भले वो हत्या , लूटपाट , चोरी जैसे अन्य जघन्य अपराध में शामिल हो सकते हो मगर वो कभी राष्ट्र द्रोही नहीं हो सकते है और वो राष्ट्र के लिए अपना धर्म भी छोड़ सकते है।
आपकी जनता और भारत मां की एक संतान , विवेक मिश्र .. अनंत  

आपके पठन-पाठन,परिचर्चा,प्रतिक्रिया हेतु,मेरी डायरी के पन्नो से,प्रस्तुत है- मेरा अनन्त आकाश

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आभार..

मैंने अपनी सोच आपके सामने रख दी.... आपने पढ भी ली,
आभार.. कृपया अपनी प्रतिक्रिया दें,
आप जब तक बतायेंगे नहीं..
मैं कैसे जानूंगा कि... आप क्या सोचते हैं ?
हमें आपकी टिप्पणी से लिखने का हौसला मिलता है।
पर
"तारीफ करें ना केवल, मेरी कमियों पर भी ध्यान दें ।

अगर कहीं कोई भूल दिखे ,संज्ञान में मेरी डाल दें । "

© सर्वाधिकार प्रयोक्तागण


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