हे भगवान,

हे भगवान,
इस अनंत अपार असीम आकाश में......!
मुझे मार्गदर्शन दो...
यह जानने का कि, कब थामे रहूँ......?
और कब छोड़ दूँ...,?
और मुझे सही निर्णय लेने की बुद्धि दो,
गरिमा के साथ ।"

आपके पठन-पाठन,परिचर्चा एवं प्रतिक्रिया हेतु मेरी डायरी के कुछ पन्ने

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गुरुवार, 12 जनवरी 2012

क्षमा करे श्री राम मुझे...

क्षमा करे श्री राम मुझे , पर सहमत नहीं हूँ मै तुमसे ।
कहने को तो कहता हूँ , मर्यादा पुरषोत्तम भगवान तुम्हे ।
पर कभी खटकती है दिल में , कुछ छोटी छोटी बात मुझे ।
यूँ तो वो भी सतयुग था , जो सत को समझ न पाया था ।
मै तो कलयुग का प्राणी हूँ , क्या समझ सकूँगा तेरे सत को ।
वो भी क्या था राज्य कोई , जो अबला की रक्षा कर न सके ।
तुम भी क्या थे पुरुष कोई , जो नारी का आश्रय बन न सके ।
केवल समाज के कहने पर ,पति धर्म का ना निर्वाह किया ।
बिना ठोस कारण के ही , एक अबला पर अत्याचार किया ।

मारा था तुमने बाली को , पर नारी गमन के कारण ही ।
पर क्या निज नारी को , उसका अपना सम्मान दिया ।
सुग्रीव भी एक अपराधी था , जिससे भय ने भ्रात द्रोह का पाप कराया ।
पर तुमने उसको गले लगाकर , छल से किष्किन्धा का राज्य दिलाया ।
इन्द्रजीत के यज्ञ को क्यों , लक्ष्मण के हाथो विध्वंस कराया ।
वो तो केवल यज्ञ ही था , क्यों धर्म कार्य जबरन रुकवाया ।
तुम तो केवल निभा सके बस , उस समय की कुछ मर्यादा को ।
क्यों नहीं रचा तुमने नूतन , सत पुरुष के नव प्रतिमानों को ।
क्षमा करे श्री राम मुझे , मै सहमत नहीं हो पाया तुमसे....... ।


सर्वाधिकार प्रयोक्तागण 2011 © ミ★विवेक मिश्र "अनंत"★彡3TW9SM3NGHMG

6 टिप्‍पणियां:

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत सारे प्रश्नों के उत्तर मांगती हैं यह पोस्ट ....

govind pandey ने कहा…

आपकी प्रस्तुति सराहनीय है...पति धर्म से पहले राजा का प्रजा के लीये जो धर्म होता है उसके लीये श्री राम ने अपनी पत्नी का परित्याग किया. उस समय वो चाहते तो दूसरी शादी भी कर सकते थे, उस समय के समाज में ये मान्य था मगर उन्होंने नहीं किया. और बालि का बध इसलिए किया क्यूँ कि छोटे भाई ने अनजाने में जो गलती कि उसकी सजा राज्य से निकाल कर और उसकी बीवी को रख कर दिया. ये सरासर अन्याय था. और रहा बात इन्द्रजीत के यज्ञ का तो वह नेक ध्येय से यज्ञ नहीं कर रहा था, वो उस शक्ति का दुरुपयोग करता इसलिए उन्होंने यज्ञ विध्वंश कराया....

Vivek Mishrs ने कहा…

Satya hai bhai Govind Pandey, Aapse na chahate huye bhi sahamat hona hi padata hai..ha.ha.haa

Magar Sita bhi to ram ki patni hone ke sath sath me unki PRAJA thi.
Kya unka koi adhikar nahi tha unke raj me jo ghar se nikal di gayi...
Aur sugreev ne jo aparadh kiya tha vo achamya hi.

रेखा ने कहा…

विचारणीय पोस्ट ...

शिवम् मिश्रा ने कहा…

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - लोहडी़ और मकर सक्रांति की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाये - ब्लॉग बुलेटिन

Pallavi saxena ने कहा…

क्षमा करें श्री राम मुझे भी॥क्यूँ ऐसे कई सारे प्रश्न मेरे मन में भी बहुदा उठा करते हैं ... सराहनीय पोस्ट आभार ...समय मिले आपको तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है http://aapki-pasand.blogspot.com/
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आपके पठन-पाठन,परिचर्चा,प्रतिक्रिया हेतु,मेरी डायरी के पन्नो से,प्रस्तुत है- मेरा अनन्त आकाश

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आभार..

मैंने अपनी सोच आपके सामने रख दी.... आपने पढ भी ली,
आभार.. कृपया अपनी प्रतिक्रिया दें,
आप जब तक बतायेंगे नहीं..
मैं कैसे जानूंगा कि... आप क्या सोचते हैं ?
हमें आपकी टिप्पणी से लिखने का हौसला मिलता है।
पर
"तारीफ करें ना केवल, मेरी कमियों पर भी ध्यान दें ।

अगर कहीं कोई भूल दिखे ,संज्ञान में मेरी डाल दें । "

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