हे भगवान,

हे भगवान,
इस अनंत अपार असीम आकाश में......!
मुझे मार्गदर्शन दो...
यह जानने का कि, कब थामे रहूँ......?
और कब छोड़ दूँ...,?
और मुझे सही निर्णय लेने की बुद्धि दो,
गरिमा के साथ ।"

आपके पठन-पाठन,परिचर्चा एवं प्रतिक्रिया हेतु मेरी डायरी के कुछ पन्ने

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सोमवार, 4 जुलाई 2011

माननीय जन-प्रतिनिधगण..

आज जब विश्व के कई  देशो में तरफ जन-आन्दोलन की भरमार है , जनता और जागरुक होती जा रही है , अपने अधिकारों के लिए धरना , प्रदर्शन और क्रांति के लिए उतावली हुयी जा रही है... तब आईये देखते है  की विभिन्न देशों की जनता के द्वारा चुने गए माननीय जन-प्रतिनिधगण पार्लियामेंट में विचारो की स्वतंत्रता के नाम पर किस प्रकार अपनी आवाज बुलंद करते है और मतान्तर होने पर दूसरो को किस प्रकारजबाब देते है...

 ये है महान रोमन साम्राज्य के इटली का नजारा 

 ये है शांति के मसीहा जापान के प्रतिनिध 

 ये है झगडा करने के माहिर मैक्सिकन

ये जन क्रांति के प्रणेता रूस  की संसद

 साऊथ कोरिया 

 ताइवान

 टर्की 

उक्रेन 

और ये हैं भारत के भाग्य विधाता 
*************************
और अब देखिये इन सबसे अलग देश , जिससे हम अपनी तुलना करने की हमेशा सोंचते है ..


 महान चीन 
भले ही यहाँ संसद में बोलने की आजादी न हो मगर सोने की भरपूर आजादी है....!!

बुधवार, 6 अक्टूबर 2010

एक पत्र.. प्यारे भाई के नाम

प्यारे भाई सिद्धार्थ
२००७ में टाटा क्रुसिबल में शुरुवात करते हुए प्रथम बार में ही इंदौर के रीजनल विजेता बनने परन्तु उचित टीम सहयोग की अनुपलब्धता के कारण नेशनल राउंड में चूक जाने, पुन: अकेले अपने दम पर २००८ एवं २००९ में संघर्ष करते हुए लखनऊ रीजनल राउंड के उपविजेता का स्थान पाकर भारी मन से घर लौटने और दो बार से प्रथम स्थान से महरूम कर रही जन्मभूमि लखनऊ में अंतत: २०१० के रीजनल विजेता बनाने का गौरव पाकर आगामी नेशनल राउंड हेतु स्थान सुनिश्चित करने के बाद अब बस मुझे इंतिजार है आपके नेशनल विजेता के गौरव को प्राप्त करने का... और भाई आप में उक्त गौरव हेतु योग्यता, क्षमता प्रारंभ से ही है मगर आप पूर्व में उसे स्वयं ही बाधित करते रहे है....
तो इस बार बस ध्यान रखना कि बिना किसी दबाव एवं ढेर सारी अपेक्षाओ के बिना नेशनल राउंड का आनंद लेने हेतु जाना और अपनी श्रेष्टतम क्षमता को नैसर्गिक रूप से उभरने देना क्योंकि तुम्हारे पास अभी खोने के लिए कुछ नहीं है बस सिर्फ पाने के लिए ही सब कुछ है....... इन दो लाइनों को याद रखना जो मुझे सर्वाधिक प्रिय हैं..
"मालिक तेरी रजा रहे और तू ही तू रहे,
बाकी ना मै रहूँ ना मेरी जुस्तजू रहे . "
हाँ इस बार तुम्हारे साथ पूर्व की तुलना में बेहतर साथी के रूप में अंकित जोशी का साथ है इसलिये उसे भी उसकी अपनी श्रेष्टतम क्षमता को साबित करने और अपने दबाव को कम करने में मदत करने का पूरा अवसर देना......
समय को तुम्हारा इंतिजार है और मुझे उस समय का
शुभकामनाओ के साथ
विवेक मिश्र .. अनंत

 
४. सिद्धार्थ मिश्र एवं श्री अंकित जोशी (बाये से ३,४ स्थान पर) :- टाटा क्रुसिबल 2010 लखनऊ रीजनल राउण्ड विजेता
  
३. सिद्धार्थ मिश्र (सबसे बाये) एवं सहयोगी श्री लोकेश कुमार टाटा क्रुसिबल  २००९ लखनऊ रीजनल राउण्ड उपविजेता

२. सिद्धार्थ मिश्र एवं सहयोगी श्री नीरज :- टाटा क्रुसिबल २००८ लखनऊ रीजनल राउण्ड उप-विजेता  
१. सिद्धार्थ मिश्र (बाये से दुसरे )  एवं सहयोगी श्री अजीत शाही :- टाटा क्रूसिबल २००७ इंदौर रीजनल राउण्ड विजेता

रविवार, 19 सितंबर 2010

ताश के गुलाम

ताश के खिलाडियों को समर्पित......

सुनो ताश के सभी गुलामों , लाओ जाकर ताश के इक्के ।
बेगम/रानी के संग जाने को , तैयार हो रहे ताश के बदिश/राजे ।
महिफिल आज जमेगी देखो , जाओ सजाओ चिड़ी का बाग ।
मौज करेंगे हम सब आज , चलो जलाएं मिलकर आग ।
ईट का बदिश/राजा कानां है , ये राज छुपाये तुम रखना ।
हुकुम की बेगम/रानी सायानी है ,  ये बात ना खुलकर तुम कहना ।
नहले पर जब दहला गिरे , इक्के से देना तुम दाब ।
तुरुप/रंग की बाजी चलकर फिर , करना सबसे तुम आदाब ।
रंग में भंग अगर कोई डाले , बच कर ना वो जाने पाये ।
कोई चाहे जितना जोर लगाये , दहला ना ले जाने पाये ।
रोंक सके जो ट्रंप/तुरुप का इक्का , पहनायेगा तुमको ताज ।
बावन पत्ते ताश के होते , लेकिन वो सबका सरताज ।
बस ध्यान रहे केवल इतना , जोर ना उसका घटने पाये ।
उसके पीछे चलने वाली , चाल ना कोई कटने पाये ।
गिरे कौन से पत्ते अबतक , तुमको रखना होगा याद ।
हाथ में कौन से पत्ते किसके , जानोगे तुम उसके बाद ।
© सर्वाधिकार प्रयोक्तागण 2010 विवेक मिश्र "अनंत" 3TW9SM3NGHMG

मंगलवार, 17 अगस्त 2010

रुपये का स्वरुप

मित्रों

लीजिये आपके अवलोकन हेतु प्रस्तुत है नए पहचान चिन्ह के साथ जारी होने वाले रुपये का स्वरुप :-

आपके पठन-पाठन,परिचर्चा,प्रतिक्रिया हेतु,मेरी डायरी के पन्नो से,प्रस्तुत है- मेरा अनन्त आकाश

मेरे ब्लाग का मोबाइल प्रारूप :-http://vivekmishra001.blogspot.com/?m=1

आभार..

मैंने अपनी सोच आपके सामने रख दी.... आपने पढ भी ली,
आभार.. कृपया अपनी प्रतिक्रिया दें,
आप जब तक बतायेंगे नहीं..
मैं कैसे जानूंगा कि... आप क्या सोचते हैं ?
हमें आपकी टिप्पणी से लिखने का हौसला मिलता है।
पर
"तारीफ करें ना केवल, मेरी कमियों पर भी ध्यान दें ।

अगर कहीं कोई भूल दिखे ,संज्ञान में मेरी डाल दें । "

© सर्वाधिकार प्रयोक्तागण


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