हे भगवान,

हे भगवान,
इस अनंत अपार असीम आकाश में......!
मुझे मार्गदर्शन दो...
यह जानने का कि, कब थामे रहूँ......?
और कब छोड़ दूँ...,?
और मुझे सही निर्णय लेने की बुद्धि दो,
गरिमा के साथ ।"

आपके पठन-पाठन,परिचर्चा एवं प्रतिक्रिया हेतु मेरी डायरी के कुछ पन्ने

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सोमवार, 28 मार्च 2011

सत्य एक ही होता है.........

किसी ने सच ही कहा है .........
अगर है हसरत मंजिल की , खोज है शौख तेरी तो ।
जिधर चाहो उधर जाओ , अंत में फिर मुझको पाओ।
*======================================*

और मेरे अपने शब्दों में ..

"राह अलग हो सकती है...
                                          काल अलग हो सकता है...
शब्द अलग हो सकते हैं...
                                          भाषा का अंतर हो सकता है...
मान अलग हो सकते हैं...
                                          परिमाण अलग हो सकते है...
विश्वास अगर सच्चा है तो...
                                           सत्य एक ही होता है............"

© सर्वाधिकार प्रयोक्तागण 2010 ミ★विवेक मिश्र "अनंत"★彡3TW9SM3NGHMG

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आभार..

मैंने अपनी सोच आपके सामने रख दी.... आपने पढ भी ली,
आभार.. कृपया अपनी प्रतिक्रिया दें,
आप जब तक बतायेंगे नहीं..
मैं कैसे जानूंगा कि... आप क्या सोचते हैं ?
हमें आपकी टिप्पणी से लिखने का हौसला मिलता है।
पर
"तारीफ करें ना केवल, मेरी कमियों पर भी ध्यान दें ।

अगर कहीं कोई भूल दिखे ,संज्ञान में मेरी डाल दें । "

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