हे भगवान,

हे भगवान,
इस अनंत अपार असीम आकाश में......!
मुझे मार्गदर्शन दो...
यह जानने का कि, कब थामे रहूँ......?
और कब छोड़ दूँ...,?
और मुझे सही निर्णय लेने की बुद्धि दो,
गरिमा के साथ ।"

आपके पठन-पाठन,परिचर्चा एवं प्रतिक्रिया हेतु मेरी डायरी के कुछ पन्ने

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शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

अरे देखो रे देखो भैया..

अरे देखो रे देखो भैया , दस दिन बाद आज अचानक देश में राहुल गाँधी नजर आये है..... माँ  के आँचल से निकल कर लोकपाल पर संसद में जादू की छड़ी घुमाने आये है !

तो राहुल गाँधी कहते है संसद में...
अन्ना का अनशन लोकतंत्र के लिए खतरा है !अरे ये लोकतंत्र के लिए खतरा हो या न हो स्विस बैंक में खाता रखने वालो के लिए जरूर खतरा है।

लोकपाल को संविधानिक दर्जा दिया जाना चाहिए !
अरे पहले लोकपाल बनाने की तो बात कीजिये राहुल बाबा... आगे का हाल आगे देखा जायेगा ।

संसद सर्वोपरि है !
कौन मना कर रहा है कि संसद सर्वोपरि नहीं है ? देश लोकपाल मांग रहा है और संसद में मात्र तफरीह हो रही है क्या ये साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि संसद सर्वोपरि है ।

चुनी हुयी सरकार को अलग नहीं रखा जा सकता है !
अरे जनता की क्या औकात कि "सरकार" को अलग रखे... सरकार तो सरकार होती है । तभी तो अन्ना ने कहा है... " मॉल खाए मदारी , नाचे बन्दर "

अकेला लोकपाल भ्रष्टाचार को ख़त्म नहीं कर पायेगा , और लोकपाल भी भ्रष्ट हो सकता है !
अरे तो क्या यह सोंच कर भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए पहला कदम भी न उठाया जाय । और भ्रष्ट तो प्रधानमंत्री भी होते है तो क्यों नहीं उस पद को समाप्त कर देते हो ।

टैक्स चोरी रोंकने और राशन कार्ड, पेंशन आसानी से प्राप्त होने के लिए जैसे  भी ध्यान दिए जाने और कानून बनाये जाने की जरुरत है !
अरे राहुल बाबा सब सब चोरो का एक ही अब्बा...भ्रष्टाचार वही  ख़त्म करने का प्रयास करो सब अपने आप सही हो जायेगा  

आपके पठन-पाठन,परिचर्चा,प्रतिक्रिया हेतु,मेरी डायरी के पन्नो से,प्रस्तुत है- मेरा अनन्त आकाश

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आभार..

मैंने अपनी सोच आपके सामने रख दी.... आपने पढ भी ली,
आभार.. कृपया अपनी प्रतिक्रिया दें,
आप जब तक बतायेंगे नहीं..
मैं कैसे जानूंगा कि... आप क्या सोचते हैं ?
हमें आपकी टिप्पणी से लिखने का हौसला मिलता है।
पर
"तारीफ करें ना केवल, मेरी कमियों पर भी ध्यान दें ।

अगर कहीं कोई भूल दिखे ,संज्ञान में मेरी डाल दें । "

© सर्वाधिकार प्रयोक्तागण


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