बस तेरे इन्तिज़ार में बैठ,
हमने सारा दिन गुजार दिया ।
तुम नहीं आये तो लगा,
हमने मुद्दते गुजार दिया ।
था भोर होने के समय से ,
तुमसे मिलने का इन्तिज़ार ।
फिर शाम आयी और ढल गयी ,
पर तुम ना आये मिलने यार ।
क्या करे मजबूर है कुछ ,
अपने किये वादे से हम ही ।
एक तेरा ही इन्तिज़ार सदा ,
करते रहे मुद्दत से बस हम ही ।
तुम ना आये मिलने अगर ,
कोई झूंठा बहाना ही बनाते ।
मिलने का हुआ मन नहीं ,
कहकर दिल ना यूँ तुम तोड़ जाते ।
सर्वाधिकार प्रयोक्तागण 2011 © ミ★विवेक मिश्र "अनंत"★彡3TW9SM3NGHMG






