"चल पड़े मेरे कदम, जिंदगी की राह में, दूर है मंजिल अभी, और फासले है नापने..। जिंदगी है बादलों सी, कब किस तरफ मुड जाय वो, बनकर घटा घनघोर सी,कब कहाँ बरस जाय वो । क्या पता उस राह में, हमराह होगा कौन मेरा । ये खुदा ही जानता, या जानता जो साथ होगा ।" ミ★विवेक मिश्र "अनंत"★彡
मेरी डायरी के पन्ने....
हे भगवान,
आपके पठन-पाठन,परिचर्चा एवं प्रतिक्रिया हेतु मेरी डायरी के कुछ पन्ने
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रविवार, 11 सितंबर 2011
शुक्रवार, 9 सितंबर 2011
जाने भी दो यारो....
जाने भी दो यारो यह तो , पूर्व नियत था नहीं पता क्या।
जब मानव अजर अमर नहीं , रिश्ते क्षणभंगुर हुए तो क्या ।
यह भूल तुम्हारी अपनी थी , अभिनय को सच मान लिया ।
रिश्तो के सौदागर को , तुमने नाहक अपना मान लिया ।
यह रंग मंच है जिस पर , अभिनय नाना प्रकार के होते है ।
हर शब्द यहाँ है पूर्वनियत , हर भाव यहाँ बे-मानी है ।
इस रंग मंच की दुनिया में , केवल चरित्र ही मरता है ।
मत उदास हो व्यर्थ यहाँ , अभिनेता जीवित रहता है ।
उसका क्या उसको प्रतिदिन , एक सा अभिनय करना है ।
तुम अश्रु गिराने लगे अगर , जीवन कहाँ फिर चलना है ।
तारीफ करो अभिनेता की , कितना जीवंत रहा अभिनय है ।
भ्रमित हो गए देख जिसे , वो कितना महान अभिनेता है ।....१७/०८/२००४
सर्वाधिकार प्रयोक्तागण 2011 © ミ★विवेक मिश्र "अनंत"★彡3TW9SM3NGHMG
प्रविष्टिकार :
Vivek Mishrs
प्रविष्टि
शुक्रवार, सितंबर 09, 2011
प्रविष्टि वर्ग:
मेरी कविताएँ,
राग-रंग
सोमवार, 29 अगस्त 2011
सत्य है इतिहास दोहराता है ...
इतिहास बताता है कि जे.पी. के आन्दोलन में उस समय के कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने पहले आरोप लगाया की सी.आई.ऐ. का हाथ है फिर आर.एस.एस. को भी जोड़ दिया ,
और वर्तमान में अन्ना के आन्दोलन में भी कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ( जिनकी सबने बारी बारी उतारी ) ने भी पहले अमेरिका का हाथ बताया फिर आर.एस.एस. को भी जोड़ दिया...
मगर न इतिहास में कांग्रेस के पास समझ थी न वर्तमान में बुद्धि समय से आयी....
जे.पी.आन्दोलन में भी बात चली थी... " यह अन्दर की बात है , पुलिस हमारे साथ है "
अन्ना के आन्दोलन में भी ... " यह अन्दर की बात थी , पुलिस जनता के साथ थी "
हाँ इतिहास हमेशा अपने को दोहराता है और इस क्रम में सभी को अक्सर दो-राहे पर लाता है , पर रास्ता तो एक ही सही होता है......!
तो जो समझदार होते है वो इतिहास से सबक लेकर पहले दिन से ही सही राह चुनते है, बाकी जो बने हुए नादान (ज्यादा बुद्धिमान) होते है वो लतियाये,जुतियाये जाने के बाद अपनी आन-मान-मर्यादा गवां कर सही रस्ते पर आते है .
और अब कुछ मन की भड़ास...जिसे फेसबुक पर कुछ देर पहले ही निकला है...
क्षमाँ करे माननीय प्रधानमंत्री जी ,
आपकी योग्यता और ईमानदारी पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगा सकता है पर क्या करियेगा....?
काजल की कोठारी में कतनो जतन करो , कालिख तो तन पर लागे ही लागे मनमोहन भैया...
जैसे
कोई कितना हो जती , कोई कितना हो सती , कामनी के संग काम जागे ही जागे राहुल भैया...
अरे हाँ स्वामी अग्नीवेश जी......परनाम (शब्द सही लिखा है)
और वर्तमान में अन्ना के आन्दोलन में भी कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ( जिनकी सबने बारी बारी उतारी ) ने भी पहले अमेरिका का हाथ बताया फिर आर.एस.एस. को भी जोड़ दिया...
मगर न इतिहास में कांग्रेस के पास समझ थी न वर्तमान में बुद्धि समय से आयी....
अफसोस चिड़िया चुग गयी खेत !
जे.पी.आन्दोलन में भी बात चली थी... " यह अन्दर की बात है , पुलिस हमारे साथ है "
अन्ना के आन्दोलन में भी ... " यह अन्दर की बात थी , पुलिस जनता के साथ थी "
हाँ इतिहास हमेशा अपने को दोहराता है और इस क्रम में सभी को अक्सर दो-राहे पर लाता है , पर रास्ता तो एक ही सही होता है......!
तो जो समझदार होते है वो इतिहास से सबक लेकर पहले दिन से ही सही राह चुनते है, बाकी जो बने हुए नादान (ज्यादा बुद्धिमान) होते है वो लतियाये,जुतियाये जाने के बाद अपनी आन-मान-मर्यादा गवां कर सही रस्ते पर आते है .
और अब कुछ मन की भड़ास...जिसे फेसबुक पर कुछ देर पहले ही निकला है...
क्षमाँ करे माननीय प्रधानमंत्री जी ,
आपकी योग्यता और ईमानदारी पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगा सकता है पर क्या करियेगा....?
काजल की कोठारी में कतनो जतन करो , कालिख तो तन पर लागे ही लागे मनमोहन भैया...
जैसे
कोई कितना हो जती , कोई कितना हो सती , कामनी के संग काम जागे ही जागे राहुल भैया...
राहुल बाबा का बस यही है नारा ...
हमें देखा था , हम देख रहे है , हम आगे भी देखेंगे..
ये नहीं हुवा है , ये नहीं हो रहा है , ये आगे भी नहीं होगा...
तभी तो जनता ने पहले यू.पी. और बिहार में कांग्रेस को पछाड़ा , आगे देखो कहाँ कहाँ है जाना लथाड़ा।
हमें देखा था , हम देख रहे है , हम आगे भी देखेंगे..
ये नहीं हुवा है , ये नहीं हो रहा है , ये आगे भी नहीं होगा...
तभी तो जनता ने पहले यू.पी. और बिहार में कांग्रेस को पछाड़ा , आगे देखो कहाँ कहाँ है जाना लथाड़ा।
जब सब त्याग दिया तो ई मोबाइलवा का मोह कब छोड़ियेगा....?
अब देखिये न इसके कारन आपकी बुढौती मा,
भगवा चुनरी में लागा हाईटेक चोर ,
भगवा चुनरी में लागा हाईटेक चोर ,
ओ बाबा देखो खुल गया तेरा पोल..
बेहतर है स्वामी जी आप कोयले की दलाली में हाथ अजमावो और बंधुवा मजदूरी में नाम कमावो
और अब एक पत्र चोरो के नाम....
.
बेहतर है स्वामी जी आप कोयले की दलाली में हाथ अजमावो और बंधुवा मजदूरी में नाम कमावो
.
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अरे अभी कहाँ लिखा , लिख रहा हूँ जल्दी ही पोस्ट करूँगा..
फ़िलहाल सोने का समय हो रहा है तो शुभ रात्रि...
अरे अभी कहाँ लिखा , लिख रहा हूँ जल्दी ही पोस्ट करूँगा..
फ़िलहाल सोने का समय हो रहा है तो शुभ रात्रि...
पर चलते चलते....दोहरा दूँ
एक अंगारा ही जंगल को जला देता है , नादां है वो जो शोलो को हवा देते है...!
प्रविष्टिकार :
Vivek Mishrs
प्रविष्टि
सोमवार, अगस्त 29, 2011
प्रविष्टि वर्ग:
आज और अब तक का बासी,
कटाक्ष,
समसामयिक
शनिवार, 27 अगस्त 2011
तुझको बारम्बार सलाम ऐ अन्ना...
रात के अंधेरो में जो बिजलियाँ चमकती हैं ,
रास्तो पर वो अन्ना के रोशनी ही करती हैं।
चिलचिलाती धूप में जो बवंडर आते है ,
अन्ना के बदन को वो ठंडक पहुँचाते है ।
कडकडाती ठण्ड में जो कोहरे घने होते है ,
घेर कर अन्ना को मक्कारों से बचा लेते है ।
कौन कहता है की ज्वार कश्तियाँ डुबो देते है ,
वो सरफरोशो के जहाजो के रास्ते बना देते है ।
बदलो के झुण्ड जो सूरज यूँ को छुपा लेते है ,
आसमान के सीने पर इन्द्रधनुष दिखा देते है ।
कौन कहता है कि अँधेरा बस सबको निगल जाता है ,
घर की चौखट पर वो अन्ना सा दिया जला जाता है।
पूजता हूँ मै नहीं उगते सूरज को अकेले ,
डूबता सूरज भी हमें राह दिखा जाता है ।
पूजे वो बलवानो को जो चलते है औरो के बल पर ,
अन्ना जैसे भीषम पितामह चलते है अपने बल पर ।
तुझको बारम्बार सलाम ऐ अन्ना,
है तुझपर दिल कुर्बान ऐ अन्ना...
कुरुक्षेत्र में अडिग है तू भीष्म पितामह के जैसा...
मन मोहे तू सारे जग का कृष्ण कन्हैया के जैसा...
सर्वाधिकार प्रयोक्तागण 2011 © ミ★विवेक मिश्र "अनंत"★彡3TW9SM3NGHMG
प्रविष्टिकार :
Vivek Mishrs
प्रविष्टि
शनिवार, अगस्त 27, 2011
प्रविष्टि वर्ग:
मूल्यांकन,
मेरी कविताएँ,
समसामयिक
शुक्रवार, 26 अगस्त 2011
अरे देखो रे देखो भैया..
अरे देखो रे देखो भैया , दस दिन बाद आज अचानक देश में राहुल गाँधी नजर आये है..... माँ के आँचल से निकल कर लोकपाल पर संसद में जादू की छड़ी घुमाने आये है !
तो राहुल गाँधी कहते है संसद में...
अन्ना का अनशन लोकतंत्र के लिए खतरा है !अरे ये लोकतंत्र के लिए खतरा हो या न हो स्विस बैंक में खाता रखने वालो के लिए जरूर खतरा है।
अन्ना का अनशन लोकतंत्र के लिए खतरा है !अरे ये लोकतंत्र के लिए खतरा हो या न हो स्विस बैंक में खाता रखने वालो के लिए जरूर खतरा है।
लोकपाल को संविधानिक दर्जा दिया जाना चाहिए !
अरे पहले लोकपाल बनाने की तो बात कीजिये राहुल बाबा... आगे का हाल आगे देखा जायेगा ।
संसद सर्वोपरि है !
कौन मना कर रहा है कि संसद सर्वोपरि नहीं है ? देश लोकपाल मांग रहा है और संसद में मात्र तफरीह हो रही है क्या ये साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि संसद सर्वोपरि है ।
चुनी हुयी सरकार को अलग नहीं रखा जा सकता है !
अरे जनता की क्या औकात कि "सरकार" को अलग रखे... सरकार तो सरकार होती है । तभी तो अन्ना ने कहा है... " मॉल खाए मदारी , नाचे बन्दर "
अकेला लोकपाल भ्रष्टाचार को ख़त्म नहीं कर पायेगा , और लोकपाल भी भ्रष्ट हो सकता है !
अरे तो क्या यह सोंच कर भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए पहला कदम भी न उठाया जाय । और भ्रष्ट तो प्रधानमंत्री भी होते है तो क्यों नहीं उस पद को समाप्त कर देते हो ।
टैक्स चोरी रोंकने और राशन कार्ड, पेंशन आसानी से प्राप्त होने के लिए जैसे भी ध्यान दिए जाने और कानून बनाये जाने की जरुरत है !
अरे राहुल बाबा सब सब चोरो का एक ही अब्बा...भ्रष्टाचार वही ख़त्म करने का प्रयास करो सब अपने आप सही हो जायेगा ।
प्रविष्टिकार :
Vivek Mishrs
प्रविष्टि
शुक्रवार, अगस्त 26, 2011
प्रविष्टि वर्ग:
कटाक्ष,
प्रश्नकाल,
समसामयिक
मंगलवार, 23 अगस्त 2011
क्या जन लोकपाल आ जाने से भ्रस्टाचार ख़त्म हो जायेगा..
बहुत से लोग पूंछते है....
क्या जन लोकपाल आ जाने से भ्रस्टाचार ख़त्म हो जायेगा...?
सारे लोग ईमानदार हो जायेंगे ?
तो मै इतना ही कहना चाहूँगा मेरे दोस्तों यूँ तो सनातन काल से देश में पुलिस की भी व्यवस्था है तो क्या चोरी हत्या या बलात्कार रुक गया है......?
नहीं ना...!
मगर जिस दिन पुलिस की व्यवस्था को ख़तम कर दिया जाय तो... सरे शाम चोरी होगी, सरे बाज़ार बलात्कार होगा...
तो जन लोकपाल भारत में राम राज्य या राजा हरिश्चंद्र का योग नहीं लायेगा मगर पता चलने पर भ्रष्टाचारियो के मुह में डंडा जरूर डाल कर जरूर उलट देगा.
और बाबा तुलसीदास ने भी भगवान रामचंद्र के हवाले से कहा है... "भय बिन होय ना प्रीत"
"मुह में डंडा" लिखने के लिए प्रबुद्ध जनो से आदर सहित खेद है.
सारे लोग ईमानदार हो जायेंगे ?
तो मै इतना ही कहना चाहूँगा मेरे दोस्तों यूँ तो सनातन काल से देश में पुलिस की भी व्यवस्था है तो क्या चोरी हत्या या बलात्कार रुक गया है......?
नहीं ना...!
मगर जिस दिन पुलिस की व्यवस्था को ख़तम कर दिया जाय तो... सरे शाम चोरी होगी, सरे बाज़ार बलात्कार होगा...
तो जन लोकपाल भारत में राम राज्य या राजा हरिश्चंद्र का योग नहीं लायेगा मगर पता चलने पर भ्रष्टाचारियो के मुह में डंडा जरूर डाल कर जरूर उलट देगा.
और बाबा तुलसीदास ने भी भगवान रामचंद्र के हवाले से कहा है... "भय बिन होय ना प्रीत"
"मुह में डंडा" लिखने के लिए प्रबुद्ध जनो से आदर सहित खेद है.
अशोक रावत जी ने सच ही कहा है..
हम गुजरे कल की आँखों का सपना ही तो है....
क्यों माने सपना कोई साकार नहीं होता....
शुक्रवार, 19 अगस्त 2011
ये क्रांति नहीं अब रुकनी है...
वैसी मन भावन बात तेरी ।
अन्ना तुझको नाम दिया ,
गाँधी का तुझे काम दिया ।
लो आज सजा फिर मंच तेरा ,
जनता बिछाती पलक पांवड़े ।
स्वागत है हे जनता जनार्दन ,
कर दो तुम सत्ता का मर्दन ।
अफसोस, नहीं हम पास तेरे ,
फिर भी हर पल हैं साथ तेरे ।
ये क्रांति नहीं अब रुकनी है ,
सत्य,अहिंसा की यह जननी है ।
यहाँ गाँधी ने उपवास किया ,
और बुद्ध ने यहाँ वास किया ।
नमन तुझे है आज के गाँधी ,
आभार तेरे पथ प्रदर्शन को ।
मेरी आँखे तरस रही हैं कबसे ,
तेरा दर्शन प्रत्यक्ष करने को ।
कटिबद्ध है तेरे संग हम सब ,
जन लोकपाल को लाने को ।
बिना रक्तमय क्रांति किये ,
प्रविष्टिकार :
Vivek Mishrs
प्रविष्टि
शुक्रवार, अगस्त 19, 2011
प्रविष्टि वर्ग:
जन-संवाद,
मेरी कविताएँ,
समसामयिक
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आपके पठन-पाठन,परिचर्चा,प्रतिक्रिया हेतु,मेरी डायरी के पन्नो से,प्रस्तुत है- मेरा अनन्त आकाश
मेरे ब्लाग का मोबाइल प्रारूप :-http://vivekmishra001.blogspot.com/?m=1
आभार..
मैंने अपनी सोच आपके सामने रख दी.... आपने पढ भी ली,
आभार.. कृपया अपनी प्रतिक्रिया दें,
आप जब तक बतायेंगे नहीं.. मैं कैसे जानूंगा कि... आप क्या सोचते हैं ?
हमें आपकी टिप्पणी से लिखने का हौसला मिलता है।
पर
"तारीफ करें ना केवल, मेरी कमियों पर भी ध्यान दें ।अगर कहीं कोई भूल दिखे ,संज्ञान में मेरी डाल दें । "
© सर्वाधिकार प्रयोक्तागण
अनंत अपार असीम आकाश by विवेक मिश्र 'अनंत' is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-ShareAlike 3.0 Unported License.
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