आप भले समझा करे , आप खुदा से कम नहीं ।
मैंने तो माना सदा , आप खुदा हो सकते नहीं ।
आप भले लगते हो सबको , लोगों के हैं भाग्य विधाता ।
आप भले ही दिखते हो , इस जग में अतुलित बलधामा ।
भले आपकी वाणी से , कम्पित होती धरती हो ।
भले आपकी इच्छा से , परिवर्तित होती सत्ता हो ।
लेकिन क्या है वश में आपके , गति रोंक सको दिवाकर की?
बदल सको दिशा काल की , पलट सको तुम लेख भाल की ।
जो भी हो तुम मानव हो , मत मानो स्वयं को खुदा अभी ।
मानवता भी पूरा पाए नहीं , दानवता ही जीते आये अभी ।
सर्वाधिकार प्रयोक्तागण 2011 © ミ★विवेक मिश्र "अनंत"★彡3TW9SM3NGHMG




