हे भगवान,

हे भगवान,
इस अनंत अपार असीम आकाश में......!
मुझे मार्गदर्शन दो...
यह जानने का कि, कब थामे रहूँ......?
और कब छोड़ दूँ...,?
और मुझे सही निर्णय लेने की बुद्धि दो,
गरिमा के साथ ।"

आपके पठन-पाठन,परिचर्चा एवं प्रतिक्रिया हेतु मेरी डायरी के कुछ पन्ने

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गुरुवार, 27 जून 2013

पल दो पल का ये जीवन ...

पल दो पल का साथ हमारा , पल में बिछुड़ ही जाना होगा ।
पता नहीं कब फिर इस जग में , लौट कर हमको आना होगा ।
लौट कर फिर जब आयेंगे , ये साथ कहाँ फिर पाएंगे ?
बदल चुकी होगी दुनिया , बिसर चुकी होंगी सब यादे ।
दूर देश से आते आते , फिर तेरे घर तक जाते जाते ।
रंग रूप बदल ही जायेगा , कोई कैसे पहचान में आएगा ?

कोस कोस पर बदले पानी , चार कोस पर बदले बानी ।
जाने क्या तब भाषा होगी , जाने क्या परिभाषा होगी ?
हो सकता है शब्द नए हो , या प्रचलन में अर्थ नए हो ।
बिसर चुकी होंगी जब यादे , बिखर चुकी होंगी बुनियादे ।
विलुप्त हो चुके होंगे रिश्ते , बस अभिलेखों में होंगे किस्से ।
जीवन होगा कोई नया सा , नहीं मिलेगा पिछला हिस्सा 

सर्वाधिकार प्रयोक्तागण 2011 © ミ★विवेक मिश्र "अनंत"★彡3TW9SM3NGHMG

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आभार..

मैंने अपनी सोच आपके सामने रख दी.... आपने पढ भी ली,
आभार.. कृपया अपनी प्रतिक्रिया दें,
आप जब तक बतायेंगे नहीं..
मैं कैसे जानूंगा कि... आप क्या सोचते हैं ?
हमें आपकी टिप्पणी से लिखने का हौसला मिलता है।
पर
"तारीफ करें ना केवल, मेरी कमियों पर भी ध्यान दें ।

अगर कहीं कोई भूल दिखे ,संज्ञान में मेरी डाल दें । "

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