हे भगवान,

हे भगवान,
इस अनंत अपार असीम आकाश में......!
मुझे मार्गदर्शन दो...
यह जानने का कि, कब थामे रहूँ......?
और कब छोड़ दूँ...,?
और मुझे सही निर्णय लेने की बुद्धि दो,
गरिमा के साथ ।"

आपके पठन-पाठन,परिचर्चा एवं प्रतिक्रिया हेतु मेरी डायरी के कुछ पन्ने

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शुक्रवार, 14 जून 2013

बीता हुवा कल...

सिलसिले जो आपने , शुरू बेबफाई के किये ।
बनकर वो काँटे नुकीले , राहों में मुझको मिले ।
आपने सोंचा भी है , हम क्यों वफ़ा करते रहे ?
यार भले नाखुश रहे , याराना तो चलता रहे ।
आप भले नाराज रहे , दूर भले ही आज रहे ।
हमको वचन निभाना है , संग चलते जाना है।

यदि समझ सको बात मेरी , फिर शुरु करो आज अभी ।
दिल में चुभोये तीरों पर , तुम वापस ले लो आज अभी ।
वो बदकिस्मत होते है , जो अपनो की वफ़ा ना पाते है ।
लेकिन उनसे ज्यादा वो , जो साथ निभा नहीं पाते है ।
मत बाँधो दिल के भावो को , अविरल इनको बहने दो ।
भले काँटो  से नाराज रहो , पर फूलो को तो मिलने दो ।


तुम आज भले ना साथ चलो , रूठे ही मुझसे आज रहो ।
मत छोड़ो कुछ मुलाकातों को , रिस्तो को तो चलने दो ।

 सर्वाधिकार प्रयोक्तागण 2011 © ミ★विवेक मिश्र "अनंत"★彡3TW9SM3NGHMG

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आभार..

मैंने अपनी सोच आपके सामने रख दी.... आपने पढ भी ली,
आभार.. कृपया अपनी प्रतिक्रिया दें,
आप जब तक बतायेंगे नहीं..
मैं कैसे जानूंगा कि... आप क्या सोचते हैं ?
हमें आपकी टिप्पणी से लिखने का हौसला मिलता है।
पर
"तारीफ करें ना केवल, मेरी कमियों पर भी ध्यान दें ।

अगर कहीं कोई भूल दिखे ,संज्ञान में मेरी डाल दें । "

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