हे भगवान,

हे भगवान,
इस अनंत अपार असीम आकाश में......!
मुझे मार्गदर्शन दो...
यह जानने का कि, कब थामे रहूँ......?
और कब छोड़ दूँ...,?
और मुझे सही निर्णय लेने की बुद्धि दो,
गरिमा के साथ ।"

आपके पठन-पाठन,परिचर्चा एवं प्रतिक्रिया हेतु मेरी डायरी के कुछ पन्ने

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गुरुवार, 26 जनवरी 2012

खाली मन...

सही कहा ये बात किसी ने , खाली मन शैतान का ।
जब चाहे वो आ जाये , मन को तेरे अपना बनाये ।
जाने क्या क्या तुझे सिखाये , मन में कैसे भाव उठाये । 
सही गलत का अंतर मिटा , मन को तेरे वो भरमाये ।
अभी पुण्य तुम करते थे , अभी पाप की जन्मी इच्छा ।
अभी दोस्ती कर पाए थे , अभी दुश्मनी की है इच्छा ।

अभी बगावत थामी थी , अभी हो गए स्वयं ही बागी ।
अभी अभी थे तुम बैरागी , अभी तुरंत ही लालच जागी ।
अब तक थे तुम ब्रह्मचारी , अभी हो गया मन व्याभिचारी ।
अभी स्वयं में सक्षम थे , अभी क्यों मन में है लाचारी ।
यूँ ही खाली रहता जब मन , बनती बिगड़ती अभिलाषाए । 
पल में विपरीत से भावो की , करती पुष्टि रुधिर शिराए ।

ऐसे  ही जाने कितने पल , मै भी खाली बैठा रहता ।
कुछ ऊल जलूल विचारो की , सीढ़ी मै चढ़ता रहता ।
उसमे से कुछ एक कभी , मेरी हकीकत को झूंठलाते ।
मन में मेरे तूफ़ान उठा , मुझको वो अति ललचाते ।
जब तक वापस ध्यान कहीं , किसी और तरफ न जाता है ।
वही पुरानी मन की इच्छा ,  जाने क्या क्या करवाता है ।


सर्वाधिकार प्रयोक्तागण 2011 © ミ★विवेक मिश्र "अनंत"★彡3TW9SM3NGHMG

3 टिप्‍पणियां:

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति|
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें|

Pallavi saxena ने कहा…

भावनात्मक प्रस्तुति....समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://aapki-pasand.blogspot.com

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून ने कहा…

:)

आपके पठन-पाठन,परिचर्चा,प्रतिक्रिया हेतु,मेरी डायरी के पन्नो से,प्रस्तुत है- मेरा अनन्त आकाश

मेरे ब्लाग का मोबाइल प्रारूप :-http://vivekmishra001.blogspot.com/?m=1

आभार..

मैंने अपनी सोच आपके सामने रख दी.... आपने पढ भी ली,
आभार.. कृपया अपनी प्रतिक्रिया दें,
आप जब तक बतायेंगे नहीं..
मैं कैसे जानूंगा कि... आप क्या सोचते हैं ?
हमें आपकी टिप्पणी से लिखने का हौसला मिलता है।
पर
"तारीफ करें ना केवल, मेरी कमियों पर भी ध्यान दें ।

अगर कहीं कोई भूल दिखे ,संज्ञान में मेरी डाल दें । "

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